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IYoM: मिलेट्स (MILLETS) यानी बाजरा को अब गरीब का भोजन नहीं, सुपर फूड कहिये

IYoM: मिलेट्स (MILLETS) यानी बाजरा को अब गरीब का भोजन नहीं, सुपर फूड कहिये

दुनिया को समझ आया बाजरा की वज्र शक्ति का माजरा, 2023 क्यों है IYoM

पोषक अनाज को भोजन में फिर सम्मान मिले - तोमर भारत की अगुवाई में मनेगा IYoM-2023 पाक महोत्सव में मध्य प्रदेश ने मारी बाजी वो कहते हैं न कि, जब तक योग विदेश जाकर योगा की पहचान न हासिल कर ले, भारत इंडिया के तौर पर न पुकारा जाने लगे, तब तक देश में बेशकीमती चीजों की कद्र नहीं होती। कमोबेश कुछ ऐसी ही कहानी है देसी अनाज बाजरा की।

IYoM 2023

गरीब का भोजन बताकर भारतीयों द्वारा लगभग त्याज्य दिये गए इस पोषक अनाज की महत्ता विश्व स्तर पर साबित होने के बाद अब इस अनाज
बाजरा (Pearl Millet) के सम्मान में वर्ष 2023 को इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स (आईवायओएम/IYoM) के रूप में राष्ट्रों ने समर्पित किया है।
इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स (IYoM) 2023 योजना का सरकारी दस्तावेज पढ़ने या पीडीऍफ़ डाउनलोड के लिए, यहां क्लिक करें
मिलेट्स (MILLETS) मतलब बाजरा के मामले में भारत की स्थिति, लौट के बुद्धू घर को आए वाली कही जा सकती है। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय पोषक-अनाज वर्ष घोषित किया है। पीआईबी (PIB) की जानकारी के अनुसार केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जुलाई मासांत में आयोजित किया गया पाक महोत्सव भारत की अगुवाई में अंतरराष्ट्रीय पोषक-अनाज वर्ष (IYoM)- 2023 लक्ष्य की दिशा में सकारात्मक कदम है। पोषक-अनाज पाक महोत्सव में कुकरी शो के जरिए मिलेट्स (MILLETS) यानी बाजरा, अथवा मोटे अनाज पर आधारित एवं मिश्रित व्यंजनों की विविधता एवं उनकी खासियत से लोग परिचित हुए। आपको बता दें, मिलेट (MILLET) शब्द का ज्वार, बाजरा आदि मोटे अनाज संबंधी कुछ संदर्भों में भी उपयोग किया जाता है। ऐसे में मिलेट के तहत बाजरा, जुवार, कोदू, कुटकी जैसी फसलें भी शामिल हो जाती हैं। पीआईबी द्वारा जारी की गई सूचना के अनुसार महोत्सव में शामिल केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मिलेट्स (MILLETS) की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

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अपने संबोधन में मंत्री तोमर ने कहा है कि, “पोषक-अनाज को हमारे भोजन की थाली में फिर से सम्मानजनक स्थान मिलना चाहिए।” उन्होंने जानकारी में बताया कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय पोषक-अनाज वर्ष घोषित किया है। यह आयोजन भारत की अगु़वाई में होगा। इस गौरवशाली जिम्मेदारी के तहत पोषक अनाज को बढ़ावा देने के लिए पीएम ने मंत्रियों के समूह को जिम्मा सौंपा है। केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर ने दिल्ली हाट में पोषक-अनाज पाक महोत्सव में (IYoM)- 2023 की भूमिका एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि, अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष (IYoM)- 2023 के तहत केंद्र सरकार द्वारा स्थानीय, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक कार्यक्रमों के आयोजन की विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई है।

बाजरा (मिलेट्स/MILLETS) की वज्र शक्ति का राज

ऐसा क्या खास है मिलेट्स (MILLETS) यानी बाजरा या मोटे अनाज में कि, इसके सम्मान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरा एक साल समर्पित कर दिया गया। तो इसका जवाब है मिलेट्स की वज्र शक्ति। यह वह शक्ति है जो इस अनाज के जमीन पर फलने फूलने से लेकर मानव एवं प्राकृतिक स्वास्थ्य की रक्षा शक्ति तक में निहित है। जी हां, कम से कम पानी की खपत, कम कार्बन फुटप्रिंट वाली बाजरा (मिलेट्स/MILLETS) की उपज सूखे की स्थिति में भी संभव है। मूल तौर पर यह जलवायु अनुकूल फसलें हैं।

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शाकाहार की ओर उन्मुख पीढ़ी के बीच शाकाहारी खाद्य पदार्थों की मांग में उल्लेखनीय रूप से वृद्धि हो रही है। ऐसे में मिलेट पॉवरफुल सुपर फूड की हैसियत अख्तियार करता जा रहा है। खास बात यह है कि, मिलेट्स (MILLETS) संतुलित आहार के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा में भी असीम योगदान देता है। मिलेट (MILLET) या फिर बाजरा या मोटा अनाज बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन और खनिजों जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का भंडार है।

त्याज्य नहीं महत्वपूर्ण हैं मिलेट्स - तोमर

आईसीएआर-आईआईएमआर, आईएचएम (पूसा) और आईएफसीए के सहयोग से आयोजित मिलेट पाक महोत्सव के मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर थे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि, “मिलेट गरीबों का भोजन है, यह कहकर इसे त्याज्य नहीं करना चाहिए, बल्कि इसे भारत द्वारा पूरे विश्व में विस्तृत किए गए योग और आयुर्वेद के महत्व की तरह प्रचारित एवं प्रसारित किया जाना चाहिए।” “भारत मिलेट की फसलों और उनके उत्पादों का अग्रणी उत्पादक और उपभोक्ता राष्ट्र है। मिलेट के सेवन और इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में जागरूकता प्रसार के लिए मैं इस प्रकार के अन्य अनेक आयोजनों की अपेक्षा करता हूं।”

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मिलेट और खाद्य सुरक्षा जागरूकता

मिलेट और खाद्य सुरक्षा संबंधी जागरूकता के लिए होटल प्रबंधन केटरिंग तथा पोषाहार संस्थान, पूसा के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि तोमर ने मिलेट्स आधारित विभिन्न व्यंजनों का स्टालों पर निरीक्षण कर टीम से चर्चा की। महोत्सव में बतौर प्रतिभागी शामिल टीमों को कार्यक्रम में पुरस्कार प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।

मध्य प्रदेश ने मारी बाजी

मिलेट से बने सर्वश्रेष्ठ पाक व्यंजन की प्रतियोगिता में 26 टीमों में से पांच टीमों को श्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर चुना गया था। इनमें से आईएचएम इंदौर, चितकारा विश्वविद्यालय और आईसीआई नोएडा ने प्रथम तीन क्रम पर स्थान बनाया जबकि आईएचएम भोपाल और आईएचएम मुंबई की टीम ने भी अंतिम दौर में सहभागिता की।

इनकी रही उपस्थिति

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री कैलाश चौधरी, कृषि सचिव मनोज आहूजा, अतिरिक्त सचिव लिखी, ICAR के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र और IIMR, हैदराबाद की निदेशक रत्नावती सहित अन्य अधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। इस दौरान उपस्थित गणमान्य नागरिकों की सुपर फूड से जुड़ी जिज्ञासाओं का भी समाधान किया गया। महोत्सव के माध्यम से मिलेट से बनने वाले भोजन के स्वास्थ्य एवं औषधीय महत्व संबंधी गुणों के बारे में लोगों को जागरूक कर इनके उपयोग के लिए प्रेरित किया गया। दिल्ली हाट में इस महोत्सव के दौरान पोषण के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं। इस विशिष्ट कार्यक्रम में अनेक स्टार्टअप ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं। 'छोटे पैमाने के उद्योगों व उद्यमियों के लिए व्यावसायिक संभावनाएं' विषय पर आधारित चर्चा से भी मिलेट संबंधी जानकारी का प्रसार हुआ। अंतर राष्ट्रीय बाजरा वर्ष (IYoM)- 2023 के तहत नुक्कड़ नाटक तथा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं जैसे कार्यक्रमों के तहत कृषि मंत्रालय ने मिलेट के गुणों का प्रसार करने की व्यापक रूपरेखा बनाई है। वसुधैव कुटुंबकम जैसे ध्येय वाक्य के धनी भारत में विदेशी अंधानुकरण के कारण शिक्षा, संस्कृति, कृषि कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय पोषक-अनाज वर्ष (IYoM)- 2023 जैसी पहल भारत की पारंपरिक किसानी के मूल से जुड़ने की अच्छी कोशिश कही जा सकती है।
तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान,पीएम ने किसानों को दिया बड़ा तोहफा

तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान,पीएम ने किसानों को दिया बड़ा तोहफा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्र को सम्बोधित करते हुए 14 महीने से विवादों में घिरे चले आ रहे तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान करके पूरे राष्ट्र को चौंका दिया। इन तीनों कृषि कानूनों को लेकर किसान लगातार आंदोलन करते चले आ रहे हैं। किसान लगातार  कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए दिल्ली सीमा पर भारी संख्या में किसान पिछले साल सितम्बर माह से आंदोलन कर रहे हैं। इस आंदोलन को लेकर सैकड़ों किसानों की जाने तक चलीं गयीं हैं। किसान इन कृषि कानूनों को लेकर सरकार से कोई भी समझौता करने को तैयार नहीं हो रहे थे। हालांकि सरकार ने यह समझाने की बहुत कोशिश की कि ये कानून छोटे किसानों के हितों के लिए हैं क्योंकि देश में 100 में से 80 किसान छोटे हैं।  लेकिन आंदोलनरत किसानों ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की जिद पकड़ ली है। किसानों की जिद के आगे सरकार को हथियार डालते हुए इन कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला लेना पड़ा।

किसानों के कल्याण के लिए ईमानदारी से कोशिश की थी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमने हमेशा किसानों की समस्याओं और उनकी चिंताओं का ध्यान रखा और उन्हें दूर करने का प्रयास किया जब आपने हमें 2014 में सत्ता सौंपी तो हमें यह लगा कि किसानों के कल्याण, उनकी आमदनी बढ़ाने का कार्य करने का निश्चय किया। हमने कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों आदि से सलाह मशविरा करके कृषि के विकास व कृषि करने की आधुनिक तकनीक को अपना कर किसानों का हित करने का प्रयास किया।  काफी विचार-विमर्श करने के बाद हमने देश के किसानों खासकर छोटे किसानों को उनकी उपज का अधिक से अधिक दाम दिलाने, उनका शोषण रोकने एवं उनकी सुविधाएं बढ़ाने के प्रयास के रूप में तीन नये कृषि कानून लाये गये। उन कृषि कानूनों को लागू किया गया।

किसानों को पूरी तरह से समझा नहीं पाये

राष्ट्र के नाम अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने सच्चे मन एवं पवित्र इरादे से देश हित व किसान हित के सारे नियमों को समेट कर ये तीन कानून बनाये।  देश के कोटि-कोटि किसानों, अनेक किसान संगठनों ने इन कृषि कानूनों का स्वागत किया एवं समर्थन दिया। इसके बावजूद किसानों का एक वर्ग इन कृषि कानूनों से नाखुश हो गया। उन्होंने कहा कि हमने इन असंतुष्ट किसानों से लगातार एक साल तक  विभिन्न स्तरों पर बातचीत करने का प्रयास किया उन्हें सरकार की मंशा को समझाने का प्रयास किया । इसके लिए हमने व्यक्तिगत व सामूहिक रूप से किसानों को समझाने का प्रयास किया।  किसानों के असंतुष्ट वर्ग को समझाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों, मार्केट विशेषज्ञों एवं अन्य जानकार लोगों की मदद लेकर पूर्ण प्रयास किया किन्तु सरकार के प्रयास सफल नहीं हो पाये। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि सरकार ने दीपक के सत्य प्रकाश जैसे कृषि कानूनों के बारे में किसानों को समझाने का पूरा प्रयास किया लेकिन हमारी तपस्या में कहीं कोई अवश्य ही कमी रह गयी होगी जिसके कारण हम किसानों को पूरी तरह समझा नहीं पाये। कृषि कानून

किसानों को मनाने का पूरा प्रयास किया

18 मिनट के राष्ट्र के नाम संदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आज गुरु नानक जयंती जैसे प्रकाशोत्सव पर किसी से कोई गिला शिकवा नहीं है और न ही हम किसी में कोई दोष ठहराने की सोच रहे हैं बल्कि हमने जिस तरह से देश हित और किसान हित में ये कृषि कानून लाये थे। भले ही देश के अधिकांश किसानों ने इन कृषि कानूनों का समर्थन किया हो लेकिन किसान का एक वर्ग नाखुश रहा और हम उसे नही समझा पाये हैं। उन्होंने कहा कि हमने किसानों को हर तरह से मनाने का प्रयास किया।

किसानों को अनेक प्रस्ताव भी दिये

आंदोलनकारी किसानों ने कृषि कानूनों के जिन प्रावधानों पर ऐतराज जताया था, सरकार उनको संशोधित करने को तैयार हो गयी थी। इसके बाद सरकार ने इन कृषि कानूनों को दो साल तक स्थगित करने का भी प्रस्ताव दिया था। इसके बावजूद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया था।  इन सब बातों को पीछे छोड़ते हुए सरकार ने नये सिरे से किसान हितों और देश के कल्याण के बारे में सोचते हुए प्रकाश पर्व जैसे अवसर पर इन कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला लिया है।\

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पिछली बातों को छोड़कर आगे बढ़ें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में आंदोलनकारी किसानों का आवाहन करते हुए कहा कि हम सब पिछली बातों को भूल जायें और नये सिरे से आगे बढ़ें और देश को आगे बढ़ाने का काम करें। उन्होंने कहा कि सरकार ने कृषि कानूनों को वापस करने का फैसला ले लिया है।  उन्होंने कहा कि में आंदोलनकारी किसानों से आग्रह करता हूं कि वे आंदोलन को समाप्त करके अपने घरों को अपने परिवार के बीच वापस लौट आयें। अपने खेतों में लौट आयें । अपने संदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इसी महीने के अंत में होने वाले संसद के सत्र में इन तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की सभी विधिक कार्यवाही पूरी की जायेंगी।

किसान हित के लिए और बड़ा प्रयास करेंगे

प्रधानमंत्री का कहना है कि सरकार अब इससे अधिक बड़ा प्रयास करेगी ताकि किसानों का कल्याण उनकी मर्जी के अनुरूप किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार ने छोटे किसानों का कल्याण करने, एमएसपी को अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने सहित सभी प्रमुख मांगों पर आम राय बनाने के लिए एक कमेटी के गठन का फैसला लिया है। जिसे शीघ्र ही गठित करके नये सिरे से इससे भी बड़ा प्रयास किया जायेगा। कृषि कानून

छोटे किसानों का कल्याण करना सरकार की प्राथमिकता

प्रधानमंत्री ने दोहराया कि हम लगातार छोटे किसानों के कल्याण के लिये प्रयास करते रहेंगे। देश में 80 प्रतिशत छोटे किसान हैं।  इन छोटे किसानों के पास दो हेक्टेयर से भी कम खेती है। इस तरह के किसानों की संख्या 10 करोड़ से भी अधिक है। हमारी सरकार ने फसल बीमा योजना को अधिक से अधिक प्रभावी बनाया। 22 करोड़ किसानों को मृदा परीक्षण कार्ड देकर उनकी कृषि करने की तकनीक में मदद की। उन किसानों की कृषि लागत कम हो गयी तथा उनका लाभ बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि छोटे किसानों को ताकत देने के लिए सरकार ने हर संभव मदद देने का प्रयास किया और आगे भी ऐसे ही प्रयास करते रहेंगे।

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सितम्बर, 2020 में शुरू हो गया था आंदोलन

लोकसभा से तीनों कृषि कानून 17 सितम्बर, 2020 को पास हो गये थे और राष्ट्रपति ने दस दिन बाद  इन कृषि कानूनों पर अपनी मुहर लगाकर लागू कर दिया था। इसके बाद ही किसानों ने अपना आंदोलन शुरू कर दिया था। ये तीन कृषि कानूनों में पहला कानून कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020, दूसरा कानून कृषक (सशक्तिकरण-संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करारा विधेयक 2020 तथा तीसरा आवश्यक वस्तु (संशोधन) 2020 नाम से तीसरा कानून था।

किन प्रावधानों पर थे किसान असंतुष्ट

किसानों को सबसे ज्यादा पहले कानून कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 के कई प्रावधानों में ऐतराज था।  मंडी के बाहर फसल बेचने की आजादी, एमएसपी और कान्टेक्ट फार्मिंग के प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जतायी गयी थी । सरकार ने अनेक स्तरों से सफाई दी और अनेक तरह के आश्वासन दिये लेकिन आंदोलनकारी किसानों को कुछ भी समझ में नहीं आया और उन्होंने किसान से इन तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की जिद ठान ली।  किसानों की जिद के सामने सरकार को आखिर झुकना पड़ा भले ही इसके लिए किसानों को 14 महीने का लम्बा समय अवश्य लगा।
पाकिस्तान को टमाटर और प्याज निर्यात करेगा भारत

पाकिस्तान को टमाटर और प्याज निर्यात करेगा भारत

भीषण बाढ़ की वजह से पाकिस्तान में दिनोंदिन हालात खराब होते जा रहे हैं। इस दौरान पूरे देश में जानमाल का भारी नुकसान हुआ है। भीषण बाढ़ आने के बाद पूरे देश में लगभग 1000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जबकि कई लाख लोग बाढ़ की वजह से प्रभावित हुए हैं। फिलहाल लगभग आधा देश बाढ़ की चपेट में है, जिससे सरकार ने पूरे देश में आपातकाल की घोषणा की है। अनुमानों के मुताबिक़ पाकिस्तान को इस बाढ़ की वजह से लगभग 10 बिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान झेलना होगा। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार लगाई है। इस मामले में कई देश पाकिस्तान की मदद कर भी रहे हैं। हाल ही में अमेरिका ने पाकिस्तान को बाढ़ रिलीफ फंड के नाम पर 30 मिलियन डॉलर की मदद दी है। इसके अलावा आपदा की इस घड़ी में कई यूरोपीय देशों के अतिरिक्त दुनियाभर के अन्य देश पाकिस्तान की मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पाकिस्तान में बाढ़ पीड़ितों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं। पाकिस्तान में बाढ़ की वजह से बहुत सारे लोग बेघर हो गये हैं। बाढ़ में उनका सामान या तो पानी के साथ बह गया है या खराब हो गया है, ऐसे में पूरे पाकिस्तान में चीजों के दामों में तेजी से इन्फ्लेशन (Inflation) देखने को मिल रहा है। वस्तुओं की कीमतें रातों रात आसमान छूने लगी हैं।


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ऐसे में खाने पीने की चीजों से लेकर सब्जियों के भी दाम आसमान छूने लगे हैं। पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान प्रांत में लगातार तीन महीने से हो रही बरसात ने सब्जियों की खेती को तबाह कर दिया है। इससे लाहौर के बाजार में टमाटर 500 रुपये प्रति किलो, जबकि प्याज 400 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलो बिक रही है। पाकिस्तान में सब्जियों के दाम लगातार आसमान की ओर जा रहे हैं, ऐसे में पाकिस्तान की मौजूदा सरकार ने भारत से टमाटर और प्याज आयात करने का मन बनाया है, ताकि देश में बढ़ती हुई सब्जियों की कीमतों में लगाम लगाई जा सके। दक्षिण भारत में और इसके साथ ही पहाड़ी राज्यों में अगस्त-सितम्बर में टमाटर की फसल की जमकर पैदावार होती है। ऐसे में अगर भारत सरकार टमाटर और प्याज के निर्यात का फैसला करती है, तो देश में किसानों को टमाटर और प्याज के अच्छे दाम मिल सकते हैं। साथ ही देश में टमाटर और प्याज की गिरती हुई कीमतों को रोका जा सकेगा।


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पाकिस्तान पहले से ही अपनी ज्यादातर खाद्य चीजों का आयात करता रहा है। गेहूं से लेकर चीनी तक के लिए पाकिस्तान दूसरे देशों पर निर्भर है। ब्राजील पाकिस्तान में चीनी का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। इसी प्रकार प्याज और टमाटर, पाकिस्तान कुछ दिनों पहले तक अफगानिस्तान से खरीद रहा था। लेकिन बलूचिस्तान और सिंध में आई बाढ़ ने पाकिस्तान में प्याज और टमाटर की मांग को बढ़ा दिया है। इसकी आपूर्ति अकेले अफगानिस्तान नहीं कर पायेगा। इसलिए अब पाकिस्तान की सरकार इस मामले में भारत से आस अलगाये हुए है, ताकि भारत पाकिस्तान की जरुरत का प्याज और टमाटर पाकिस्तान को निर्यात करे, जिससे देश में प्याज और टमाटर की कमी न होने पाए और इन चीजों के भाव नियंत्रण में रहें।
पीएम मोदी ने जारी की किसान सम्मान निधि की 11वीं किस्त, ऐसे चेक करें लिस्ट में अपना नाम

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किसानों को 21,000 करोड़ रुपये से अधिक की सम्मान निधि राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांफफर कर दी है। पीएम मोदी जी द्वारा यह राशि शिमला में आयोजित 'गरीब कल्याण सम्मेलन' कार्यक्रम के दौरान किसानों के खाते में सीधे ट्रांसफर की गई है। इसके बाद उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा लाभार्थियों से बातचीत भी की।

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इस किस्त के साथ ही केंद्र सरकार द्वारा अब तक किसानों के खाते में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर हो चुकी है। इस योजना की पहली किस्त 1 दिसंबर 2018 से 31 मार्च 2019 के बीच जारी की गई थी। तब से भारत के किसानों को सालाना 6000 रुपये दे रही है। इस योजना की 11वीं किस्त ट्रांसफर करने के कार्यक्रम के दौरान दिल्ली से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी मौजूद रहे।

किसान सम्मान निधि की 11वीं किस्त : आवश्यक जानकारी

अगर आप भी किसान भाई हैं और पीएम जी की इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं या आप इस योजना में जुड़े होने के बावजूद किसी कारणवश आपके रुपये खाते में नही आ रहे हैं तो इस योजना का लाभ उठाने के लिए आप अपनी केवाईसी अपडेट करा लें। केवाईसी अपडेट करने की अंतिम तारीख 31 मई ही है। अगर आप अपनी केवाईसी आखिरी तारीख तक अपडेट नहीं कराते हैं तो पीएम किसान की 2000 रुपये किस्त का लाभ नहीं ले सकेंगे। पीएम किसान निधि योजना के तहत हर साल प्रत्येक लाभार्थी को ₹6000 प्राप्त होते हैं। यह राशि एक साथ ना आकर ₹2000 की तीन किस्तों में किसान को मिलती है।

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इस तरह ऑनलाइन अपडेट करें KYC:

स्टेप 1. पीएम किसान की अधिकारिक वेबसाइट पर जाएं स्टेप 2. दाईं ओर दिए गए विकल्पों की eKYC पर क्लिक करें। स्टेप 3. अपना आधार कार्ड नंबर, कैप्चा कोड दर्ज करके सर्च पर क्लिक करें। स्टेप 4. अपना मोबाइल नंबर डालें जो आधार कार्ड से लिंक हो। स्टेप 5. अब 'गेट ओटीपी' पर क्लिक करके प्राप्त हुआ रोटी भी दर्ज करें। इसके साथ ही अभी केवाईसी अपडेट हो जाएगी।

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पीएम किसान में लाभार्थी की स्थिति देखने का यह है प्रोसेस:

स्टेप 1. पीएम किसान सम्मान निधि की अधिकारिक वेबसाइट- pmkisan.gov.in पर जाएं। स्टेप 2. 'Beneficiary Status' विकल्प पर क्लिक करें। स्टेप 3. आधार नंबर खाता नंबर और अपना मोबाइल नंबर से किसी एक का चयन करें। स्टेप 4. इसके साथ आप 'Get data' पर क्लिक करके अपना स्टेटस देख सकते हैं।  
प्राकृतिक खेती के साथ देसी गाय पालने वाले किसानों को 26000 दे रही है सरकार

प्राकृतिक खेती के साथ देसी गाय पालने वाले किसानों को 26000 दे रही है सरकार

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को बढ़ावा देने के लिए पूरे देश में मुहिम छेड़ दी है। कई राज्यों में पीएम की इस मुहिम को आगे बढाने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। इस फैसले से प्रदेश के 26000 किसानों को फायदा मिलेगा। प्राकृतिक खेती के साथ-साथ देसी गाय पालने वाले मध्यप्रदेश के 26000 किसानों को प्रतिमाह 900 रु की आर्थिक मदद मिलेगी। नेचुरल फार्मिंग योजना को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने सबसे अच्छी पहल की है।

पहले चरण के लिए जारी हुई एडवाइजरी

- प्राकृतिक खेती के साथ-साथ देसी गाय पालने पर मध्यप्रदेश से 26000 किसानों की आर्थिक मदद करेगी। इस योजना को सफल बनाने के लिए पहले चरण की 28 करोड़ 08 लाख रु खर्च करने की मंजूरी मिल चुकी है।

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5200 गांव के किसानों को मिलेगा लाभ

- सरकार की इस योजना में प्रदेश के 26000 किसानों तक लाभ पहुंचेगा। इसके लिए प्रदेश के 5200 गांवों को इस योजना में शामिल किया जाएगा। सरकार की मंत्री-परिषद की बैठक में निर्णय लिया गया है कि प्राकृतिक खेती के साथ एक देसी गाय पालने वाले पशुपालक को अनुदान के रूप में 26000 रूपए दिए जाएंगे। योजना में 52 जिले के 5200 गांवों के किसानों को जोड़ा जाएगा। प्रत्येक जिले से 100 गांव होंगे।

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योजना में शामिल किसानों को दी जाएगी ट्रेनिंग

- मध्यप्रदेश सरकार ने इस योजना के अंतर्गत प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को ट्रेनिंग देने की योजना बनाई गई है। प्राधिक्षण में शामिल होने वाले प्रत्येक किसान को 400 प्रति दिन का खर्चा मिलेगा। जिसके लिए सरकार ने 39 करोड़ 50 लाख रु अलग से वहन करने की बात कही है। साथ ही प्राकृतिक कृषि किट लेने वाले किसानों को 75 फीसदी छूट का प्रावधान है और मास्टर ट्रेनर को 1000 रु प्रतिदिन मिलेंगे।
देश में खेती-किसानी और कृषि से जुड़ी योजनाओं के बारे में जानिए

देश में खेती-किसानी और कृषि से जुड़ी योजनाओं के बारे में जानिए

नई दिल्ली। - लोकेन्द्र नरवार देश में खेती-किसानी और कृषि से जुड़ी तमाम योजनाएं संचालित हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वाली कैबिनेट में देश के किसानों की आय दोगुनी करने के लिए किसानों व कृषि के लिए तरह-तरह की योजनाएं बनाई गईं हैं। इन योजनाओं के जरिए फसल उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ-साथ किसानों को आर्थिक मदद प्रदान की जा रही है। इसके अलावा देश के किसानों को अपना फसल उत्पादन बेचने के लिए एक अच्छा बाजार प्रदान किया जा रहा है। किसानों के लिए चलाई जा रहीं तमाम कल्याणकारी योजनाओं में समय के साथ कई सुधार भी किए जाते हैं। जिनका प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से किसानों को ही फायदा मिलता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर - ICAR) द्वारा ''आजादी के अमृत महोत्सव'' पर एक पुस्तक का विमोचन किया है। इस पुस्तक में देश के 75000 सफल किसानों की सफलता की कहानियों को संकलित किया गया है, जिनकी आमदनी दोगुनी से अधिक हुई है।


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आइए जानते हैं किसानों के लिए संचालित हैं कौन-कौन सी योजनाएं....

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना ( PM-Kisan Samman Nidhi ) - इस योजना के अंतर्गत किसानों के खाते में सरकार द्वारा रुपए भेजे जाते हैं। ◆ ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई योजना - इस योजना के माध्यम से किसान पानी का बेहतर उपयोग करते हैं। इसमें 'प्रति बूंद अधिक फसल' की पहल से किसानों की लागत कम और उत्पादन ज्यादा की संभावना रहती है। ◆ परम्परागत कृषि विकास योजना (Paramparagat Krishi Vikas Yojana (PKVY)) - इस योजना के जरिए जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाता है। ◆ प्रधानमंत्री किसान मान-धन योजना (पीएम-केएमवाई) - इस योजना में किसानों को वृद्धा पेंशन प्रदान करने का प्रावधन है। ◆ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana - PMFBY) - इस योजना के अंतर्गत किसानों की फसल का बीमा होता है। ◆ न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) - इसके अंतर्गत किसानों को सभी रबी की फसलों व सभी खरीफ की फसलों पर सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मूल्य प्रदान किया जाता है। ◆ मृदा स्वास्थ्य कार्ड- (Soil Health Card Scheme) इसके अंतर्गत उर्वरकों का उपयोग को युक्तिसंगत बनाया जाता है। ◆ कृषि वानिकी - 'हर मोड़ पर पेड़' की पहल द्वारा किसानों की अतिरिक्त आय होती है। ◆ राष्ट्रीय बांस मिशन - इसमें गैर-वन सरकारी के साथ-साथ निजी भूमि पर बांस रोपण को बढ़ावा देने, मूल्य संवर्धन, उत्पाद विकास और बाजारों पर जोर देने के लिए काम होता है। ◆ प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण - इस नई नीति के तहत किसानों को उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित कराने का प्रावधान है। ◆ एकीकृत बागवानी विकास मिशन - जैसे मधुमक्खी पालन के तहत परागण के माध्यम से फसलों की उत्पादकता बढ़ाने और आमदनी के अतिरिक्त स्त्रोत के रूप में शहद उत्पादन में वृद्धि होती है। ◆ किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) - इसके अंतर्गत कृषि फसलों के साथ-साथ डेयरी और मत्स्य पालन के लिए किसानों को उत्पादन ऋण मुहैया कराया जाता है। ◆ प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana (PMKSY))- इसके तहत फसल की सिंचाई होती है। ◆ ई-एनएएम पहल- यह पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफार्म के लिए होती है। ◆ पर्याप्त संस्थागत कृषि ऋण - इसमें प्रवाह सुनिश्चित करना और ब्याज सबवेंशन का लाभ मिलता है। ◆ कृषि अवसंरचना कोष- इसमें एक लाख करोड़ रुपए के आकार के साथ बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए विशेष ध्यान दिया जाता है। ◆ किसानों के हित में 10 हजार एफपीओ का गठन किया गया है। ◆ डिजिटल प्रौद्योगिकी - कृषि मूल्य श्रंखला के सभी चरणों में डिजिटल प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग पर जरूर ध्यान देना चाहिए  
प्राकृतिक खेती के जरिये इस प्रकार होगा गौ संरक्षण

प्राकृतिक खेती के जरिये इस प्रकार होगा गौ संरक्षण

मध्य प्रदेश राज्य के मुरैना जनपद में आयोजित हुए कृषि मेला के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया है, कि खेती में डीएपी, यूरिया का बेहद कम इस्तेमाल करें। साथ ही, जैव उर्वरक व नैनो यूरिया का प्रयोग बढ़ना चाहिए। किसानों को जैविक व प्राकृतिक खेती की तरफ रुख करना चाहिए। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों से प्राकृतिक खेती पर अधिक ध्यान देने की बात कही है। मध्य प्रदेश के मुरैना जनपद में आयोजित कृषि मेले में उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से गौवंश की उपयोगिता में वृद्धि होगी। गाय के गोबर व गौमूत्र के प्रयोग से उर्वरक निर्मित करेंगे तो निश्चित रूप से कम लागत लगेगी। साथ ही, इस प्रकार से उत्पादन करना स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद रहेगा। आज आवश्यकता इस बात की है, कि खेती की लागत कम हो और किसानों की आमदनी बढ़ती रहे। उत्पाद उम्दा किस्म के होने चाहिए एवं खेतों में सूक्ष्म सिंचाई का प्रयोग करना चाहिए, इससे जल की बचत भी होगी और फसल की पैदावार भी होगी। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का यह भी कहना है, कि भारत में ८० प्रतिशत लघु किसान हैं, जिनकी सहायता के लिए १० हजार नवीन एफपीओ गठित करने की योजना तैयार की है। जिसके लिए ६,८६५ करोड़ खर्च करेगी केंद्र सरकार।


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खाद्य तेलों की कमी की भरपाई होगी

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि तिलहन की घटोत्तरी व आयात निर्भरता को कम करने हेतु सरकार द्वारा ऑयल पाम मिशन बनाया गया है। जिसके लिए ११ हजार करोड़ रूपये खर्च करेगी सरकार। किसान तकनीक का इस्तेमाल करेंगे तो इसका लाभ आने वाली पीढ़ियों को भी होगा एवं गांव देहातों में नवीन आय के स्त्रोत उत्पन्न होंगे। भारत एक कृषि प्रधान देश है इसलिए आर्थिक संकट व मुसीबत की घड़ी में कृषि क्षेत्र अपनी अहम भूमिका निभाता है

इन किसानों को काफी लाभ मिलेगा

नरेंद्र तोमर ने कहा कि यह कृषि मेला अंचल, चंबल व ग्वालियर के लिए बेहतर कृषि के हिसाब से बहुत सहायक साबित होगा। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर ने इस कृषि मेले के दौरान लगभग हजारों किसानों का मार्गदर्शन किया एवं प्रशिक्षण भी दिया साथ ही किसानों की सहायता हेतु भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) समेत पुरे देश से आये हुए कृषि संस्थानों से जुड़े वैज्ञानिकों को साधूवाद दिया। साथ ही, मेले को आयोजित करने हेतु समस्त सहायक निधियों का आभार व्यक्त किया। [embed]https://www.youtube.com/watch?v=BwU3hGXNodM&t=86s[/embed]

नरेंद्र तोमर ने कहा किसानों की आय दोगुनी हो गयी है

नरेंद्र तोमर का कहना है कि आज कृषि संबंधित योजनाएं आय बढ़ाने से संबंधित बनाई गयी हैं जबकि पूर्व में सिर्फ पैदावार से संबंधित योजनाएं बनाई जाती थी। आय में वृद्धि हेतु कई सारी योजनाएं लागू की जा रही हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों की आय दोगुना से ज्यादा करने के लिए कहा उसके उपरांत केंद्र एवं राज्य सरकारों व किसानों ने एक जुट होकर इस ओर भरपूर प्रयास किए हैं। श्रीनगर (कश्मीर) में केसर का उत्पादन होता है, इसलिए केंद्र सरकार द्वारा केसर पार्क स्थापित हुआ साथ ही अन्य सहायक सुविधाऐं प्रदान की जिसके परिणामस्वरूप १ लाख रूपये किलो भाव से बढ़कर २ लाख रूपये किलो हो गयी है।
अब तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से नहीं जुड़े हैं? फौरन करें ये काम

अब तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से नहीं जुड़े हैं? फौरन करें ये काम

देश के किसानों की आर्थिक हालत सुधारने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत हर लाभुक को एक साल में 6 हजार रुपये दिये जाते हैं। इस सूची की हर महीने स्क्रूटनी की जा रही है। अयोग्य लोगों के नाम सूची से काट कर उनसे वसूली भी की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस देश में कई क्रांतिकारी योजनाएं लागू कीं। इनमें आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना प्रमुख हैं। एक तरफ आयुष्मान भारत हेल्थ सेक्टर की दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्कीम है। तो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना दुनिया की सबसे कल्याणकारी योजना है, जिसमें गरीब किसानों को प्रति चार माह में 2000 रुपये की मदद राशि दी जाती है। मकसद साफ है, देश का किसान खुशहाल रहे, उसे भूखमरी का शिकार न होना पड़े। वह खेती न छोड़े, यह योजना तीन साल से चल रही है। अगर आप किन्हीं कारणों से अब तक इस योजना का लाभ न ले पाएं हों तो इस लेख को गौर से पढ़ें।


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योग्यता

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में वही हिस्सा ले सकता है, जो मूलतः किसान हो, उसके पास दो हेक्टेयर से ज्यादा भूमि न हो, जमीन के कागजात जिनके नाम पर हों, वही इस योजना का लाभ ले सकते हैं, आधार कार्ड होना अनिवार्य है। जो पता आप दे रहे हैं, (आधार न होने की स्थिति में) उसका सुबूत देना होगा बैंक खाता होना अत्यावश्यक है।

कैसे करें आवेदन

इस योजना का लाभ लेने के लिए आपको बहुत भटकने की जरूरत नहीं है, आप इस योजना की आधिकारिक वेबसाइट (https://pmkisan.gov.in/) पर जाएं और जो-जो उसमें जरूरतें मांगी गई हैं, उन्हें पूरा करें। जब आप सफलतापूर्वक उसे पूर्ण कर लेंगे तो आपको एक संवाद मिलेगा। यह संवाद आपके मोबाइल और मेल आईडी पर आएगा, आपके बैंक को वेरीफाई किया जाएगा। इस प्रोसेस को पूरा करने के बाद आप प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के पात्र हो जाएंगे।

फ्राड से बचें

साल के 6000 रुपये के लिए भी भारत में फ्राड हो रहा है। कई किसान ऐसे हैं (जो वास्तव में किसान नहीं हैं) जो फर्जी नाम-पता-मोबाइल नंबर डाल कर पंजीकरण करा लेते हैं। हर साल 6000 रुपये का लाभ ले लेते हैं, अब ऐसे लोगों को सरकार खोज-खोज कर निकाल रही है। अकेले यूपी में ही 22 लाख से ज्यादा फर्जी किसान पकड़े हैं, इन सभी को अब कोर्ट के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, वसूली हो रही है सो अलग।

कल्याण के लिए है योजना

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के कल्याण के लिए है, यह उन किसानों के लिए है, जो बिचारे कम रकबे में खेती करते हैं. परिवार बड़ा है, आमदनी के साधन कम हैं। उन छोटे किसानों को थोड़ा सपोर्ट करने के लिए ये योजना है। इसका मकसद सिर्फ इतना है कि किसान खुश रहे। रोजमर्रा की उनकी जिंदगी सुचारू रुप से चले। हालांकि, इस योजना का मकसद यह कतई नहीं है, कि आप खेती-बाड़ी छोड़ दें और मात्र 6000 रुपये में अपना गुजारा करने की सोचें, यह होने वाला भी नहीं।
इस खाद्य उत्पाद का बढ़ सकता है भाव प्रभावित हो सकता है घरेलु बजट

इस खाद्य उत्पाद का बढ़ सकता है भाव प्रभावित हो सकता है घरेलु बजट

यूक्रेन व रूस युद्ध की वजह से अर्थव्यवस्था बेहद प्रभावित हो रही है। दुनिया इन दिनों आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है, जो देश समृद्धशाली नहीं हैं, वह महामारी तथा ईंधन के बढ़ते मूल्यों से चिंताग्रस्त हैं। यूक्रेन युद्ध की वजह से गेहूं समान आवश्यक खाद्य उत्पादों के भंडारण को काफी प्रभावित किया है। जिससे गेहूं के भाव में वृध्दि की संभावना है। बतादें कि रूस के विरुद्ध पश्चिमी प्रतिबंधों ने समस्त देशों हेतु व्यापार विकल्पों को कम कर दिया है। इसका सीधा प्रभाव सर्वाधिक दुर्बल लोगों पर देखने को मिल रहा है। आधुनीकरण के साथ नवीन बाजार एवं नवीन अर्थव्यवस्थाएं भी सामने आ रही हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) यूक्रेन युद्ध एवं रूस पर प्रतिबंधों की वजह से बेहद ही संकट की घड़ी का सामना कर रही है। इसी वजह से विश्व की खाद्यान आपूर्ति एवं व्यवसाय का ढांचा ध्वस्त हो चुका है। बतादें कि इसी वजह से आधारभूत उत्पादों का भी भाव तीव्रता से बढ़ रहा है, जिसमें ईंधन, भोजन एवं उर्वरक इत्यादि शामिल हैं। साथ ही, खाद्य सुरक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में निश्चित रूप से गेंहू के भाव में वृध्दि होगी, यदि गेहूं के भाव में बढ़ोत्तरी आयी तो लोगों का घरेलू बजट खराब हो सकता है। दरअसल, यूक्रेन युद्ध की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी समस्या के घेरे में आ गयी है, जो कि पूर्व से ही अमेरिका और यूनाइडेट किंग्डम (United Kingdom) के खराब संबंधों व कोरोना महामारी जैसी चुनौतियों के कारण प्रभावित हो चुकी है।


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हालाँकि, अब भारत ने जी20 में अपना परचम लहरा दिया है। बतादें कि भारत ३० नवंबर २०२३ तक भारत १९ सर्वाधिक धनी देशों व यूरोपीय संघ के समूह का नेतृत्व करेगा। यह सकल विश्व उत्पाद का ८५ फीसद एवं वैश्विक जनसँख्या का ६० फीसद हिस्सा है। ऐसे दौर में जब विश्व बदलाव की ओर बढ़ रहा है, विश्व के सर्वाधिक धनी एवं राजनीतिक दृष्टिकोण से सर्वाधिक शक्तिशाली देशों के समूह का अध्यक्ष होने की वजह से भारत के समक्ष विभिन्न अवसरों के साथ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा।

रूस यूक्रेन युद्ध के संबंध में पीएम मोदी ने क्या कहा

भारत को काफी तात्कालिक समस्याओं से निपटना होगा उनमें यूक्रेन युद्ध को बंद करने हेतु भारत की अध्यक्षता का प्रयोग करना आवश्यक होगा। जी२० समूह के अध्यक्ष के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले संबोधन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अपनी पुनः सलाह देते हुए कहा कि आज का दौर व युग लड़ाई झगडे या युद्ध का नहीं है। बतादें कि युद्ध के कारण खाद्यान संबंधित चुनौती बढ़ गयी है।

वसुधैव कुटुम्बकम बना अस्थायी खंबा

फिलहाल, जी२० अध्यक्ष का अध्यक्ष होने के नाते भारत सही ढंग से ताकत का उपयोग कर पायेगा। शिखर सम्मेलन के साथ-साथ शेरपाओं की समानांतर बैठक की मेजबानी भारत करेगा एवं वित्त मंत्रियों एवं विश्वभर के देशों के रिजर्व बैंकों के प्रमुखों की बैठकों में हिस्सा लेगा। इसमें भारत विश्व के आर्थिक शासन में बेहतरीन परिवर्तन की बात करेगा। विश्व बैंक व आईएमएफ की भाँति ब्रिटेन वुड्स संस्थान पर भी भारत स्वयं के पद का प्रयोग कर पायेगा। भारत उन देशों को शक्ति प्रदान करेगा जो कि वैश्विक आर्थिक शासन को बेहतर बनाने के साथ भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सकारात्मक परिवर्तन हेतु भी दबाव बना सकता है। अनुमानुसार अगले वर्ष चीन को पीछे छोड़ भारत विश्व का सर्वाधिक जनसँख्या वाला देश बन जाएगा।
जानें भारत विश्व में फसल बीमा क्लेम दर के मामले में कौन-से स्थान पर है

जानें भारत विश्व में फसल बीमा क्लेम दर के मामले में कौन-से स्थान पर है

भारत अमेरिका एवं चीन, विश्व के फसल बीमा प्रीमियम का 70% फीसद भुगतान करते हैं। दरअसल, अमेरिका व कनाडा में बीमा कंपनियों के संचालन एवं उनके समुचित प्रबंधन का खर्च अथवा भुगतान सरकार द्वारा वहन किया जाता है। इटली एवं कनाड़ा के उपरांत भारत में फसल बीमा क्लेम की तादात सर्वाधिक होती है। कृषि बीमा के प्रमुख एवं अंतर्राष्ट्रीय रीइंश्योरेंस एंड इंश्योरेंस कंसल्टेंसी एवं ब्रोकिंग सर्विसेज के वरिष्ठ सलाहकार कोल्ली एन राव द्वारा किए गए एक अध्ययन में विशेष बात सामने आयी है। अध्ययन में पता चला है, कि बीते सात साल के दौरान भारत में औसत फसल बीमा क्लेम दर 83% प्रतिशत था। जबकि इटली में 98% एवं कनाडा में यह 99% था। विशेष बात यह है, कि चीन और तुर्की के में फसल बीमा क्लेम दर सर्वाधिक कम था।
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अध्ययन के अनुसार, तुर्की एवं चीन में फसल बीमा क्लेम दर क्रमश: 55% एवं 59% था। यदि भारत की बात की जाये तो साल 2016 में, जब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना द्वारा वर्तमान क्लेम सब्सिडी-आधारित मॉडल को परिवर्तित कर दिया, तो भारत में फसल बीमा बहुत ज्यादा प्रसिद्ध हो गया। बीते सात सालों में, बीमा कंपनियों ने प्रीमियम में 1,54,265 करोड़ रुपये लिए एवं क्लेम के रूप में 1,28,418 रुपये करोड़ का भुगतान हो कर दिया। इसकी वजह से उनको 83% प्रतिशत का क्लेम अनुपात प्राप्त हुआ है।

जानें क्लेम दर कितने प्रतिशत से ज्यादा थी

2016 एवं 2018 के मध्य, तमिलनाडु में प्रचंड सूखा की स्थिति बनी थी। जिसके चलते 8,397 करोड़ रुपये का क्लेम किया गया, जो कि 4,085 करोड़ रुपये के सकल प्रीमियम के 200% फीसद से ज्यादा था। इसी प्रकार, महाराष्ट्र में कृषकों को अत्यंत बारिश की वजह से 2019 में करीब 4,500 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मिली, तब उनकी फसल पककर कटाई लायक हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि कर्नाटक, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तेलंगाना एवं ओड़िशा समेत बहुत सारे राज्यों के क्षेत्र में बदहाल मौसम की वजह से एक या अधिक वर्षों में क्लेम दर 100% फीसद से ज्यादा थी।

18 बीमा कंपनियों में से कितनी कंपनियों ने ऐसा करना किया बंद

अत्यंत आवश्यक समय के चलते, राव ने बताया है, कि पीएमएफबीवाई(PMFBY) सरकार हर एक मुख्य जनपदों में 50 से 100 लोगों को भेजती है। तकरीबन 2,500 करोड़ रुपये का प्रीमियम दर्ज करने वाली कंपनी के लिए, PMFBY हेतु लाभ-अलाभ बिंदु करीब 90% फीसद क्लेम का अनुपात है। उनका यह भी कहना है, कि 2020 से व्यापार काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है, इसलिए फसल बीमा विक्रय करने वाली 18 बीमा कंपनियों में से आठ ने ऐसा करना बिल्कुल समाप्त कर दिया है।
केंद्र सरकार ने 'खोपरा' नारियल के न्यूनतम समर्थन मूल्य को दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने 'खोपरा' नारियल के न्यूनतम समर्थन मूल्य को दी मंजूरी

भारत सरकार देश के किसानों की आय को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में राज्य तथा केंद्र सरकारें आए दिन कृषि नीति और कानून में किसान हितैषी बदलाव करती रहती हैं। ताकि किसानों को फायदा हो और वह अपने पैरों पर खड़ी रह सकें। हाल ही में भारत सरकार की कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मिलिंग खोपरा (नारियल) के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 270 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की है। इसी के साथ सरकार ने घोषणा की है, कि अब बॉल खोपरा के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी 750 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ोत्तरी की गई है। सरकार की इस घोषणा से नारियल उत्पादक किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी किए जानें से किसान भाई नारियल की खेती के लिए प्रोत्साहित होंगे। जिससे नारियल की खेती का रकबा बढ़ाने में मदद मिलेगी। अगर इस खेती से किसानों को अच्छी आमदनी होने लगती है, तो नारियल का प्रसंस्करण बिजनेस को बढ़ाने में भी किसान आगे आ सकते हैं।

न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने के बाद अब इस कीमत पर बिकेगा नारियल

सरकार ने कहा है, कि नारियल का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने के बाद अब मिलिंग खोपरा 10,860 रुपये क्विंटल के भाव पर बिकेगा। नारियल की इस किस्म पर 270 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की गई है। जब कि बॉल खोपरा नारियल 11,750 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिकेगा। इस नारियल पर 750 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की गई है। न्यूनतम समर्थन मूल्य के बढ़ने से नारियल के किसानों का मुनाफा बढ़ने की पूरी संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने कहा है, कि नारियल की कीमतों का निर्धारण कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिश पर किया गया है। साथ ही, कीमतों के निर्धारण में प्रमुख नारियल उत्पादक राज्यों के सुझावों पर भी गौर किया गया है। नारियल की खेती गेहूं, चावल और सब्जियों से ज्यादा मुनाफे वाली खेती होती है। यदि किसान वैज्ञानिक तकनीकों के जरिए नारियल की खेती करें, तो इस खेती से किसान बंपर कमाई कर सकते हैं। नारियल की खेती में एक बार रोपाई करने के बाद आगामी 80 सालों तक इसकी फसल ली जा सकती है। साथ ही, नारियल के बाग में खाली पड़ी जमीन में काली मिर्च, इलायची या दूसरी मसाला फसलों की खेती करके अतिरिक्त आय भी अर्जित की जा सकती है।


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इन दिनों भारत के साथ ही विदेशी बाजारों में साबुत नारियल तथा नारियल के तेल की जबरदस्त मांग है। साथ ही, इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे भविष्य में किसानों के पास इस खेती से अच्छी कमाई करने का मौका होगा।
यह राज्य कर रहा है मिलेट्स के क्षेत्रफल में दोगुनी बढ़ोत्तरी

यह राज्य कर रहा है मिलेट्स के क्षेत्रफल में दोगुनी बढ़ोत्तरी

साल 2023 में उत्तर प्रदेश सरकार मिलेट्स के क्षेत्रफल को बढ़ाएगी। प्रदेश सरकार इस रकबे को 11 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 25 लाख तक करेगी। राज्य सरकार ने अपने स्तर से तैयारियों का शुभारंभ क्र दिया है। आने वाले साल 2023 को दुनिया मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाएगी। मिलेट्स वर्ष मनाए जाने की पहल एवं इसकी शुरुआत में भारत सरकार की अहम भूमिका रही है। भारत में मिलेट्स का उत्पादन अन्य सभी देशों से अधिक होता है। देश का मोटा अनाज पूरी दुनिया में अपना एक विशेष स्थान रखता है। इसी वजह से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी मोटे अनाज को उत्सव के तौर पर मनाकर देश की प्रसिद्ध को दुनियाभर में फैलाना चाहते हैं। कुछ ही दिन पहले मोदी जी ने दिल्ली में आयोजित हुए एक कार्यक्रम में मोटे अनाज का बना हुआ खाना खाया था। भारत के विभिन्न राज्यों में मोटा अनाज का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है। मिलेट्स इयर आने की वजह से उत्तर प्रदेश राज्य में मोटे अनाज के उत्पादन का क्षेत्रफल बाद गया है।

उत्तर प्रदेश राज्य कितने हैक्टेयर में करेगा मोटे अनाज का उत्पादन

खबरों के मुताबिक, प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने मिलेट्स इयर के संबंध में राज्य के कृषि विभाग के अधिकारीयों को बुलाकर इस विषय पर बैठक की है। इस बैठक में जिस मुख्य विषय पर चर्चा की गयी वह यह था, कि वर्तमान में 11 लाख हेक्टेयर में मोटे अनाज का उत्पादन हो रहा है। इसको साल 2023 में 25 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाया जाए। हालाँकि लक्ष्य थोड़ा ज्यादा बड़ा है, विभाग के अधिकारी पहले से ही इस बात के लिए तैयारी में जुट जाएँ।


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उत्तर प्रदेश सरकार ने कितना लक्ष्य तय किया है

राज्य सरकार द्वारा अधीनस्थों को आगामी वर्ष में मोटे अनाज का क्षेत्रफल दोगुने से ज्यादा वृद्धि का आदेश दिया है। बतादें, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोटे अनाज से संबंधित पहल को बेहद ही गहनता पूर्वक लिया गया है। साथ ही, इस विषय के लिए उत्तर प्रदेश सरकार भी काफी गंभीरता दिखा रही है। उत्तर प्रदेश में सिंचित क्षेत्रफल का इलाका 86 फीसद हैं। बतादें, कि इस रकबे में दलहन, तिलहन, धान, गेहूं का उत्पादन किया जाता जाती है।

कहाँ से खरीदेगी सरकार बीज

कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देेश दिया गया है, कि कर्नाटक एवं आंध्र प्रदेश आदि राज्यों के अधिकारियों से संपर्क साधें। राज्य में बुआई हेतु मोटे अनाज के बीज की बेहतरीन व्यवस्था की जाए। सबसे पहली बार 18 जनपदों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बाजरा खरीदा जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में कितना किया जायेगा अनाज का उत्पादन

उत्तर प्रदेश के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देश में मोटे अनाज की मुख्य फसलें जिनका अच्छा उत्पादन भी होता है, वह ज्वार एवं बाजरा हैं। महाराष्ट्र राजस्थान, उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर बाजरा का उत्पादन किया जाता है। क्षेत्रफलानुसार बात की जाए तो उत्तर प्रदेश 9 .04 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 6.88, राजस्थान में 43.48 लाख हेक्टेयर में बाजरे का उत्पादन किया जाता है। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य की पैदावार प्रति हेक्टेयर 2156 किलो ग्राम है। राजस्थान का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 1049 किलोग्राम एवं महाराष्ट्र की पैदावार की बात करें तो 955 किलो ग्राम है।

ज्वार के उत्पादन का क्षेत्रफल कितना बढ़ा है

राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में ज्वार का अच्छा खासा उत्पादन होता है। क्षेत्रफल के तौर पर कर्नाटक प्रति हेक्टेयर प्रति क्विंटल पैदावार के मामले में अव्वल स्थान है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ज्वार की पैदावार बढ़ाने के लिए काफी जोर दे रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2022 में 1.71 लाख हेक्टेयर उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन वर्ष 2023 में इसको 1.71 लाख हैक्टेयर से बढ़ाकर 2.24 लाख हेक्टेयर तक पहुँचा दिया है। इसी प्रकार सावां व कोदो का रकबा भी पहले से दोगुना कर दिया गया है।